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द्रोण पर्व
अध्याय १००
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सञ्जय़ उवाच
तत्र देवाः स्म भाषन्ते चारणाश्च समागताः |  ७   क
एतदन्ताः समूहा वै भविष्यन्ति महीतले ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति