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द्रोण पर्व
अध्याय ५०
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सञ्जय़ उवाच
स च वीरान्रणे हत्वा राजपुत्रान्महावलान् |  ६६   क
वीरैराकाङ्क्षितं मृत्युं सम्प्राप्तोऽभिमुखो रणे ||  ६६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति