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कर्ण पर्व
अध्याय ५०
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अर्जुन उवाच
अद्य तं पापकर्माणं सानुवन्धं रणे शरैः |  ३१   क
नय़ाम्यन्तं समासाद्य राधेय़ं वलगर्वितम् ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति