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कर्ण पर्व
अध्याय ५०
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अर्जुन उवाच
नाहत्वा विनिवर्तेऽहं कर्णमद्य रणाजिरात् |  ३४   क
इति सत्येन ते पादौ स्पृशामि जगतीपते ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति