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वन पर्व
अध्याय १५५
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वैशम्पाय़न उवाच
तमुपक्रम्य राजर्षिं धर्मात्मानमरिन्दमाः |  १८   क
पाण्डवा वृषपर्वाणमवन्दन्त गतक्लमाः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति