कर्ण पर्व  अध्याय ५०

सञ्जय़ उवाच

सर्वैरवध्यो राधेय़ो देवैरपि सवासवैः |  ६२   क
ऋते त्वामिति मे वुद्धिस्त्वमद्य जहि सूतजम् ||  ६२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति