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शल्य पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
ऋषिसंसदि तं दृष्ट्वा सा नदी मुनिसत्तमम् |  १२   क
ततः प्रोवाच राजेन्द्र ददती पुत्रमस्य तम् |  १२   ख
व्रह्मर्षे तव पुत्रोऽय़ं त्वद्भक्त्या धारितो मय़ा ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति