वन पर्व  अध्याय २८१

सत्यवानु उवाच

न कदाचिद्विकाले हि गतपूर्वो मय़ाश्रमः |  ८१   क
अनागताय़ां सन्ध्याय़ां माता मे प्ररुणद्धि माम् ||  ८१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति