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शल्य पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
तस्यां द्वादशवार्षिक्यामनावृष्ट्यां महर्षय़ः |  ३५   क
वृत्त्यर्थं प्राद्रवन्राजन्क्षुधार्ताः सर्वतोदिशम् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति