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शल्य पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
तेषां क्षुधापरीतानां नष्टा वेदा विधावताम् |  ४०   क
सर्वेषामेव राजेन्द्र न कश्चित्प्रतिभानवान् ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति