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शल्य पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
मुष्टिं मुष्टिं ततः सर्वे दर्भाणां तेऽभ्युपाहरन् |  ५०   क
तस्यासनार्थं विप्रर्षेर्वालस्यापि वशे स्थिताः ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति