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शल्य पर्व
अध्याय ५०
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वैशम्पाय़न उवाच
तां दिव्यवपुषं दृष्ट्वा तस्यर्षेर्भावितात्मनः |  ९   क
रेतः स्कन्नं सरस्वत्यां तत्सा जग्राह निम्नगा ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति