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आदि पर्व
अध्याय ६१
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वैशम्पाय़न उवाच
गणः क्रोधवशो नाम यस्ते राजन्प्रकीर्तितः |  ५४   क
ततः सञ्जज्ञिरे वीराः क्षिताविह नराधिपाः ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति