शान्ति पर्व  अध्याय ५१

वासुदेव उवाच

न ह्यभक्ताय़ राजेन्द्र भक्ताय़ानृजवे न च |  ११   क
दर्शय़ाम्यहमात्मानं न चादान्ताय़ भारत ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति