अनुशासन पर्व  अध्याय ५१

भीष्म उवाच

अनर्घेय़ा महाराज द्विजा वर्णमहत्तमाः |  २२   क
गावश्च पृथिवीपाल गौर्मूल्यं परिकल्प्यताम् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति