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अनुशासन पर्व
अध्याय ५१
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च्यवन उवाच
गावो लक्ष्म्याः सदा मूलं गोषु पाप्मा न विद्यते |  २८   क
अन्नमेव सदा गावो देवानां परमं हविः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति