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अनुशासन पर्व
अध्याय ५१
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च्यवन उवाच
स्वाहाकारवषट्कारौ गोषु नित्यं प्रतिष्ठितौ |  २९   क
गावो यज्ञप्रणेत्र्यो वै तथा यज्ञस्य ता मुखम् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति