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अनुशासन पर्व
अध्याय ५१
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च्यवन उवाच
गावः स्वर्गस्य सोपानं गावः स्वर्गेऽपि पूजिताः |  ३३   क
गावः कामदुघा देव्यो नान्यत्किञ्चित्परं स्मृतम् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति