अनुशासन पर्व  अध्याय ५१

भीष्म उवाच

ततो जग्राह धर्मे स स्थितिमिन्द्रनिभो नृपः |  ४४   क
तथेति चोदितः प्रीतस्तावृषी प्रत्यपूजय़त् ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति