आदि पर्व  अध्याय २१३

वैशम्पाय़न उवाच

सर्वसंहननोपेतं सर्वलक्षणलक्षितम् |  ६८   क
दुर्धर्षमृषभस्कन्धं व्यात्ताननमिवोरगम् ||  ६८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति