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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५१
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वैशम्पाय़न उवाच
तौ समासाद्य राजानं वार्ष्णेय़कुरुपुङ्गवौ |  ३६   क
निषीदतुरनुज्ञातौ प्रीय़माणेन तेन वै ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति