आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ५१

युधिष्ठिर उवाच

रोचते मे महावाहो गमनं तव केशव |  ४३   क
मातुलश्चिरदृष्टो मे त्वय़ा देवी च देवकी ||  ४३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति