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सभा पर्व
अध्याय ५१
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धृतराष्ट्र उवाच
नेह क्षत्तः कलहस्तप्स्यते मां; न चेद्दैवं प्रतिलोमं भविष्यत् |  २५   क
धात्रा तु दिष्टस्य वशे किलेदं; सर्वं जगच्चेष्टति न स्वतन्त्रम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति