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शल्य पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
अव्रवीच्च तदा रामो दृष्ट्वा कृष्णं च पाण्डवम् |  ४   क
दुर्योधनं च कौरव्यं गदापाणिमवस्थितम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति