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विराट पर्व
अध्याय ५१
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वैशम्पाय़न उवाच
सर्वदेवनिकाय़ाश्च सिद्धाश्च परमर्षय़ः |  १३   क
अर्जुनस्य कुरूणां च द्रष्टुं युद्धमुपागताः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति