विराट पर्व  अध्याय ५१

वैशम्पाय़न उवाच

तथा राजा वसुमना वलाक्षः सुप्रतर्दनः |  ९   क
अष्टकश्च शिविश्चैव यय़ातिर्नहुषो गय़ः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति