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उद्योग पर्व
अध्याय ५१
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धृतराष्ट्र उवाच
यस्य वै नानृता वाचः प्रवृत्ता अनुशुश्रुमः |  १   क
त्रैलोक्यमपि तस्य स्याद्योद्धा यस्य धनञ्जय़ः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति