उद्योग पर्व  अध्याय ५१

धृतराष्ट्र उवाच

कृष्णावेकरथे यत्तावधिज्यं गाण्डिवं धनुः |  ११   क
युगपत्त्रीणि तेजांसि समेतान्यनुशुश्रुमः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति