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द्रोण पर्व
अध्याय ५१
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युधिष्ठिर उवाच
वृहद्वलं च राजानं स्वर्गेणाजौ प्रय़ोज्य ह |  १४   क
ततः परमधर्मात्मा दिष्टान्तमुपजग्मिवान् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति