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द्रोण पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
रक्षमाणाश्च तं सङ्ख्ये ये मां योत्स्यन्ति केचन |  २३   क
अपि द्रोणकृपौ वीरौ छादय़िष्यामि ताञ्शरैः ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति