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द्रोण पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
यद्येतदेवं सङ्ग्रामे न कुर्यां पुरुषर्षभाः |  २४   क
मा स्म पुण्यकृतां लोकान्प्राप्नुय़ां शूरसंमतान् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति