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द्रोण पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
अर्जुनेन प्रतिज्ञाते पाञ्चजन्यं जनार्दनः |  ४१   क
प्रदध्मौ तत्र सङ्क्रुद्धो देवदत्तं धनञ्जय़ः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति