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वन पर्व
अध्याय २४२
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वैशम्पाय़न उवाच
यदा क्रोधहविर्मोक्ता धार्तराष्ट्रेषु पाण्डवः |  १५   क
आगन्तारस्तदा स्मेति वाच्यस्ते स सुय़ोधनः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति