अनुशासन पर्व  अध्याय १८

गालव उवाच

श्रुत्वा जनन्या वचनं निराशो गुरुदर्शने |  ४०   क
निय़तात्मा महादेवमपश्यं सोऽव्रवीच्च माम् ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति