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कर्ण पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
भवता तु वलं सर्वं धार्तराष्ट्रस्य वारितम् |  ४२   क
ततो द्रोणो हतो युद्धे पार्षतेन धनञ्जय़ ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति