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कर्ण पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
स्थिरा वुद्धिर्नरेन्द्रस्य धार्तराष्ट्रस्य मानद |  ६२   क
कर्णः पार्थान्रणे सर्वान्विजेष्यति न संशय़ः ||  ६२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति