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कर्ण पर्व
अध्याय ५१
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सञ्जय़ उवाच
य एकः पाण्डवीं सेनां शरौघैः समवेष्टय़त् |  ९६   क
तं समासाद्य पाञ्चाला भीष्मं नासन्पराङ्मुखाः ||  ९६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति