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शल्य पर्व
अध्याय ५१
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वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते चास्या जग्राह पाणिं गालवसम्भवः |  १४   क
ऋषिः प्राक्षृङ्गवान्नाम समय़ं चेदमव्रवीत् ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति