आदि पर्व  अध्याय ५२

सूत उवाच

वासुकेः कुलजांस्तावत्प्राधान्येन निवोध मे |  ४   क
नीलरक्तान्सितान्घोरान्महाकाय़ान्विषोल्वणान् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति