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शान्ति पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृष्णस्य तद्वाक्यं धर्मार्थसहितं हितम् |  १   क
श्रुत्वा शान्तनवो भीष्मः प्रत्युवाच कृताञ्जलिः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति