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शान्ति पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततस्ते धर्मनिरताः सम्यक्तैरभिपूजिताः |  २९   क
श्वः समेष्याम इत्युक्त्वा यथेष्टं त्वरिता यय़ुः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति