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शान्ति पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
यद्धि किञ्चित्कृतं लोके कर्तव्यं क्रिय़ते च यत् |  ४   क
त्वत्तस्तन्निःसृतं देव लोका वुद्धिमय़ा हि ते ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति