अनुशासन पर्व  अध्याय ५२

युधिष्ठिर उवाच

संशय़ो मे महाप्राज्ञ सुमहान्सागरोपमः |  १   क
तन्मे शृणु महावाहो श्रुत्वा चाख्यातुमर्हसि ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति