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शल्य पर्व
अध्याय ७
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धृतराष्ट्र उवाच
कथं रणे हतः शल्यो धर्मराजेन सञ्जय़ |  १४   क
भीमेन च महावाहुः पुत्रो दुर्योधनो मम ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति