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द्रोण पर्व
अध्याय ७७
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वासुदेव उवाच
त्वां हि लोकास्त्रय़ः पार्थ ससुरासुरमानुषाः |  ९   क
नोत्सहन्ते रणे जेतुं किमुतैकः सुय़ोधनः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति