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सभा पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्र गान्धारीं देवीं पतिमनुव्रताम् |  २७   क
स्नुषाभिः संवृतां शश्वत्ताराभिरिव रोहिणीम् ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति