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सभा पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
अभिवाद्य स गान्धारीं तय़ा च प्रतिनन्दितः |  २८   क
ददर्श पितरं वृद्धं प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम् ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति