अनुशासन पर्व  अध्याय २

भीष्म उवाच

सुदर्शनस्तु मनसा कर्मणा चक्षुषा गिरा |  ६७   क
त्यक्तेर्ष्यस्त्यक्तमन्युश्च स्मय़मानोऽव्रवीदिदम् ||  ६७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति