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सभा पर्व
अध्याय ५२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः कृताह्निकाः सर्वे दिव्यचन्दनरूषिताः |  ३४   क
कल्याणमनसश्चैव व्राह्मणान्स्वस्ति वाच्य च ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति