सभा पर्व  अध्याय ५२

विदुर उवाच

राजा महात्मा कुशली सपुत्र; आस्ते वृतो ज्ञातिभिरिन्द्रकल्पैः |  ६   क
प्रीतो राजन्पुत्रगणैर्विनीतै; र्विशोक एवात्मरतिर्दृढात्मा ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति